काव्य श्रृंखला – 39

नेताजी सरकार चलाएंगे कल तक वो छूटभाई थे, रिजॉर्ट में छिपाए जाएंगेबिक न जाए घोड़ा कहीं, घर में घुडसाल बनाएंगेनोटों के बदले वोट से आगे, वो सरकार बनाएंगेकल के नेताजी…

काव्य श्रृंखला – 15

रोते हो क्या उसने पूछा, रोते हो क्यामैं बोल दिया, हां कभी कभीउसने समझा मैं बुजदिल हूंकायर, डरपोक, नादान सभी क्या समझाऊं, क्या बताऊं उसेक्या समझेगा वो रीत मेरीक्यों रोता…