काव्य श्रृंखला – 61

प्रकृति का उपहार कोयलों की कूक कहीं पपीहों का गान सुनोप्यारी ये प्रकृति मधुर संगीत सुनाती हैहरे भरे कोपलों से मन को प्रफुल्ल करोकोमल मुलायम पत्ती अधर भी खिलाती हैलाल…

काव्य श्रृंखला – 60

प्रेम ही तो लिखता हूं स्पर्श मधुरनख शिख वर्णनप्रिय काम कला नहीं लिखता हूं सुंदर गातेंकटि, अधर, वलयबस युवा प्रणय नहीं लिखता हूं जीवन रसदिल की बातेंजो लखता हूं, वही…

काव्य श्रृंखला – 57

सौदा .....!!!!! सांसों की लड़ीघटती हर घड़ीआतुर रिश्ते करते सौदाजीने पर जीवन भर सौदामरने पर शव का भी सौदा रुकती सांसेंमरती आसेंमुद्रा पर सेहत का सौदाजीने पर चलने का सौदामरने…