काव्य श्रृंखला – 63

खुशियों की राखी बातों नातों में सरस मधुमयखटके क्यों युति उसकी चपलाएक नार सृजित सर्जित सकलाकर्तव्य सृजन फिर क्यों अबला पय सुधा पिला बनी मातृ मधुरसमरस समोदर भगिनी सबलाजब धार…

काव्य श्रृंखला – 61

प्रकृति का उपहार कोयलों की कूक कहीं पपीहों का गान सुनोप्यारी ये प्रकृति मधुर संगीत सुनाती हैहरे भरे कोपलों से मन को प्रफुल्ल करोकोमल मुलायम पत्ती अधर भी खिलाती हैलाल…

काव्य श्रृंखला – 60

प्रेम ही तो लिखता हूं स्पर्श मधुरनख शिख वर्णनप्रिय काम कला नहीं लिखता हूं सुंदर गातेंकटि, अधर, वलयबस युवा प्रणय नहीं लिखता हूं जीवन रसदिल की बातेंजो लखता हूं, वही…

काव्य श्रृंखला – 45

क्या हुआ अगर चले थे ढूंढने इंसानियत गुमनाम राहों मेंदिशाएं स्याह, काले मन, बड़ी संगीन दुनिया थीभले मानुष दिखे अब रेड डाटा बुक के पन्नों परसड़ी बुद्धि, भ्रमित जनता, बड़ी…