काव्य श्रृंखला – 61

प्रकृति का उपहार कोयलों की कूक कहीं पपीहों का गान सुनोप्यारी ये प्रकृति मधुर संगीत सुनाती हैहरे भरे कोपलों से मन को प्रफुल्ल करोकोमल मुलायम पत्ती अधर भी खिलाती हैलाल…

महाशिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ

दिव्य गुणों से भरा है मन, मगर चंचल सदा से हैचला जाता कहीं अक्सर, बिना पूछे बिना बूझे प्रभु समझें कठिन पीड़ा जो है अरदास सेवक कीजलाएँ ज्योति अंतर्मन जो…