काव्य श्रृंखला – 61

प्रकृति का उपहार कोयलों की कूक कहीं पपीहों का गान सुनोप्यारी ये प्रकृति मधुर संगीत सुनाती हैहरे भरे कोपलों से मन को प्रफुल्ल करोकोमल मुलायम पत्ती अधर भी खिलाती हैलाल…