काव्य श्रृंखला – 57

सौदा .....!!!!! सांसों की लड़ीघटती हर घड़ीआतुर रिश्ते करते सौदाजीने पर जीवन भर सौदामरने पर शव का भी सौदा रुकती सांसेंमरती आसेंमुद्रा पर सेहत का सौदाजीने पर चलने का सौदामरने…

काव्य श्रृंखला – 45

क्या हुआ अगर चले थे ढूंढने इंसानियत गुमनाम राहों मेंदिशाएं स्याह, काले मन, बड़ी संगीन दुनिया थीभले मानुष दिखे अब रेड डाटा बुक के पन्नों परसड़ी बुद्धि, भ्रमित जनता, बड़ी…

काव्य श्रृंखला – 39

नेताजी सरकार चलाएंगे कल तक वो छूटभाई थे, रिजॉर्ट में छिपाए जाएंगेबिक न जाए घोड़ा कहीं, घर में घुडसाल बनाएंगेनोटों के बदले वोट से आगे, वो सरकार बनाएंगेकल के नेताजी…