काव्य श्रृंखला – 45

क्या हुआ अगर चले थे ढूंढने इंसानियत गुमनाम राहों मेंदिशाएं स्याह, काले मन, बड़ी संगीन दुनिया थीभले मानुष दिखे अब रेड डाटा बुक के पन्नों परसड़ी बुद्धि, भ्रमित जनता, बड़ी…

काव्य श्रृंखला – 44

दान या दिखावा लड़कर वो खुद शमशीरों सेपत्थर को मकान बनाता हैआजीवन इज्जत को तरसेचुपचाप कहीं मर जाता है देखें हैं लुटेरे अरबों केबंगलों की नींव हैं लाशों परआंखों की…

सामयिकी – 26 – 27 दिसंबर 2019

विषय – वस्तु राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर – 2020प्रति व्यक्ति बिजली की खपतविस्टाडोम ट्रेन का परिचालन शुरुऑयल एंड गैस सेक्टर के विवादों के निपटारे के लिए कमेटी का गठनउत्तर प्रदेश में…