गीता माणिक्य – 5


अध्याय – 1 / श्लोक – 7, 8, 9, 10, 11

अस्माकं तु विशिष्टा ये  तान्निबोध द्विजोत्तम।
नायका मम सैन्यस्य संज्ञार्थं तान्ब्रवीमि ते।।7।।

भवान्भीष्मश्च कर्णश्च कृपश्च समीतिन्जय।
अश्वत्थामा विकर्णश्च सौमदत्तिस्तथैव च।।8।।

अन्ये च बहवः शूरा मदर्थे त्यक्तजीविताः।
नानाशस्त्रप्रहरणाः सर्वे युद्धविशारदाः।।9।।

अपर्याप्तं तदस्माकं बलं भीष्माभिरक्षितम्।
पर्याप्तं त्विदमेतेषां बलं भीमाभिरक्षितम्।।10।।

अयनेषु च सर्वेषु यथाभागमवस्थिता।
भीष्ममेवाभिरक्षन्तु भवन्तः सर्व एव हि।।11।।

अनुवाद –

दुर्योधन द्रोणाचार्य से कहता है – हे ब्राह्मणश्रेष्ठǃ आपकी सूचना के लिए मैं आपको अपनी सेना के उन शूरवीरों के विषय में जानकारी देना चाहूंगा जो मेरे सैन्यसंचालन में विशेष रुप से निपुण हैं। मेरी सेना में भी स्वयं आप (द्रोणाचार्य), भीष्म, कर्ण, कृपाचार्य, अश्वत्थामा, विकर्ण और सोमदत्त के पुत्र (भूरिश्रवा) जैसे अजेय योद्धा हैं। इनके अतिरिक्त भी मेरी सेना में विभिन्न प्रकार के शस्त्रों से सुसज्जित एवं युद्धकुशल ऐसे अनेक वीर योद्धा हैं जो युद्ध में मेरे लिए अपने प्राण त्यागने के लिए भी तत्पर हैं। महान भीष्म द्वारा संरक्षित हमारी सैन्यशक्ति अपरिमेय है जबकि भीम द्वारा संरक्षित होने के बावजूद पाण्डवों की सेना की शक्ति सीमित है। अतः युद्ध क्षेत्र में सैन्यव्यूह में नियोजित अपने अपने मोर्चों पर तैयार रहकर आप सभी भीष्म पितामह की सहायता करें।

दुर्योधन दोनों सेनाओं के आकलन के दौरान अपने सेनापति आचार्य द्रोण को यह बताना नहीं भूला कि उनके अधीन कार्यरत सेना युद्ध हेतु सम्मुख खड़ी पाण्डव सेना से कहीं से भी कम नहीं है। एक कुशल राजा और सेनापति का यह उत्तरदायित्व होता है कि सर्वाधिक विषम परिस्थितियों में भी सेना का मनोबल टूटने न पाए जिससे एक हारे हुए युद्ध को भी उत्साह के जरिए जीत में बदलने का प्रयत्न किया जा सके। दुर्योधन ने तुलनात्मक रुप से भी अपनी सेना की श्रेष्ठता का बखान किया और अपने राजा होने के दायित्व का निर्वहन किया।

दुर्योधन को यह तथ्य भलीभांति ज्ञात था कि उसकी मृत्यु भीम के हाथों ही होनी लिखी है अतः वह भीम के प्रति हमेशा शत्रुता का ही भाव रखता था। यह सत्य था कि भीष्म पितामह की तुलना में भीम का अनुभव नगण्य था। यह भी सत्य था कि दुर्योधन के पक्ष में एक अत्यन्त विशाल एवं शक्तिशाली सेना तैयार थी जिसका नेतृत्व उसके मित्र राजा कर रहे थे। एक तरह से उसके मित्र राजाओं की एक पूरी मंडली उसके पक्ष में युद्ध हेतु तत्पर थी जो मित्रता तो निभा रहे थे लेकिन पापी दुर्योधन का साथ देने के कारण उनके स्वयं के विनाश का दुर्योग देख सकने में असक्षम थे।

कूटनीति के माहिर खिलाड़ी दुर्योधन को यह भी आभास था कि किसी एक योद्धा को महत्व दिया जाना बाकी योद्धाओं को हतोत्साहित कर सकता है अतः उसने बड़ी ही चालाकी से सभी योद्धाओं को यह कहते हुए एक ही कतार में लाकर खड़ा कर दिया कि भीष्म पितामह निःसंदेह एक कुशल एवं महानतम योद्धा है किंतु उनकी उम्र को देखते हुए उन्हें हर मोर्चे पर तैनात प्रत्येक योद्धा के अधिकतम सहयोग एवं शौर्य की आवश्यकता होगी। अतः प्रत्येक योद्धा युद्ध में अपना शत प्रतिशत देने हेतु सदैव तत्पर रहे।

कर्ण – कुन्ति का पुत्र, पाण्डवाें का भाई
अश्वत्थामा – द्रोणाचार्य का पुत्र
कृपाचार्य – द्रोणाचार्य की पत्नी के जुड़वा भाई
विकर्ण – दुर्योधन का भाई
सोमदत्ति अथवा भूरिश्रवा – बाह्लिकों के राजा का पुत्र

चर्चा जारी रहेगी
तब तक के लिए
जय श्रीकृष्ण

– Arun अर्पण

यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत I
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानम सृज्याहम II

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम I
धर्म संस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे II

जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्त्वत:I
त्यक्त्वा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोऽर्जुन II

वीतरागभयक्रोधा मन्मया मामुपाश्रिताः:I
बहवो ज्ञानतपसा पूता मद्भावमागताः॥

ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम् |
मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्या: पार्थ सर्वश: II

काङ्क्षन्तः कर्मणां सिद्धिं यजन्त इह देवताः ।
क्षिप्रं हि मानुषे लोके सिद्धिर्भवति कर्मजा ॥

चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्मविभागशः ।
तस्य कर्तारमपि मां विद्ध्यकर्तारमव्ययम् ॥

न मां कर्माणि लिम्पन्ति न मे कर्मफले स्पृहा ।
इति मां योऽभिजानाति कर्मभिर्न स बध्यते ॥

एवं ज्ञात्वा कृतं कर्म पूर्वैरपि मुमुक्षुभिः ।
कुरु कर्मैव तस्मात्त्वं पूर्वैः पूर्वतरं कृतम् ॥

आप इस श्रृंखला की पिछले भागों को नीचे दिए गए लिंक द्वारा भी पढ़ सकते हैं–

गीता माणिक्य
गीता माणिक्य – 1
गीता माणिक्य – 2
गीता माणिक्य – 3
गीता माणिक्य – 4

हमारी रचनाओं की क्रमिक ऑडियो विजुअल प्रस्तुति के लिए हमारे यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करें–

Albela Darpan

6 Comments

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.