गीता माणिक्य – 1

अध्याय–1/श्लोक–1 धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः। मामकाः पाण्डवाश्चैव किंकुर्वत संजय।। अनुवाद–धृतराष्ट्र ने कहा– हे संजय! धर्म के क्षेत्र कुरुक्षेत्र में युद्ध की इच्छा से एकत्र हुए पाण्डु के पुत्रों तथा मेरे…

गीता माणिक्य

ॐ अज्ञान तिमिरान्धस्य ज्ञानांजनशलाकयाचक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्री गुरवे नमः।। श्री चैतन्यमनोSभीष्टं स्थापितं येन भूतले।स्वयं रुपः कदा मह्यं ददाति स्वपदान्तिकम्।। वन्देSहं श्रीगुरोः श्रीयुतपदकमलं श्रीगुरुन् वैष्णवांश्च।श्रीरुपं साग्रजातं सहगणरघुनाथान्वितं तं सजीवम्।। साद्वैतं सावधूतं…

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WordMeaningSynonymsOnerousकष्टदायक---do--भारीHeavyBulkyBurdensomeCumbersomeCumbrous--do--दुर्वह/दुर्भरOncrousUnwieldyRealpolitikराजनीति-Nudgeखिसकानाकोहनी से हल्का धक्का-Inoculateटीका लगानाVaccinateEngraftInosculateIngraftMomentousसबसे अहमMassive--do--प्रभावशालीImpressiveInfluentialEffectivePowerfulEfficaciousProwessकौशल---do--साहसGritCourageousnessDaringEffronteryFortitude--do--वीरताHeroismGallantryChivalryfieriness--do--दिलेरीMettleCourageSpunkBoldnessDoughtinessSurfeitअतिरेकExcess--do--आधिक्यIntensificationGlutAbundanceIntensitySuperfluity--do--उबMonotonyProliferationप्रसारSpreadingDiffusionDisseminationPrevalenceDispersal--do--फैलावDispersionSpreadDilationExpansion--do--तीव्र वृद्धिRapid ProgressRadicalisationकट्टरता-Depictचित्रितशब्दों में वर्णनवर्णन करनाDelineateDescribeDepictureFigureCharacterizeRepresentWeanछुड़ानादूध छुड़ानाDisengageUnbindReleaseVacateUnfetterOverwhelmedअभिभूत---do--व्याकुलUneasyAddledRestlessAnxiousUpset--do--व्यग्रEmbarrassedNervousPerturbedContemplateमनन करनाFancyविचार करनाConsiderPonderMullThinkOpineचिंतन करनाDeviseRuminateReflectArraignदोषारोपण-अपराधी ठहरानाAccuseSentenceदोष लगानाDelateBlameIncriminateInculpateकलंक लगानाDenigrateAsperseStainTraduceSlurProscribeदेश से निकालनाExileबहिष्कार करनाBoycottEstrangeTake awayत्याग करनाEschewSacrificeRecantCedeDisclaim Compiled by - Arun अर्पण Subscribe to…

काव्य श्रृंखला – 63

खुशियों की राखी बातों नातों में सरस मधुमयखटके क्यों युति उसकी चपलाएक नार सृजित सर्जित सकलाकर्तव्य सृजन फिर क्यों अबला पय सुधा पिला बनी मातृ मधुरसमरस समोदर भगिनी सबलाजब धार…

काव्य श्रृंखला – 62

मानव बनाम चप्पल टूटी चप्पल, हुई विचलित नारचुपचाप खड़ी मोची के द्वारपतले प्लास्टिक में बंधी चप्पलना थी खुलने की जिद पर यार निष्ठुर मोची था धुन में मगनललना को नजर…

काव्य श्रृंखला – 61

प्रकृति का उपहार कोयलों की कूक कहीं पपीहों का गान सुनोप्यारी ये प्रकृति मधुर संगीत सुनाती हैहरे भरे कोपलों से मन को प्रफुल्ल करोकोमल मुलायम पत्ती अधर भी खिलाती हैलाल…