काव्य श्रृंखला – 34

चंद्रयान – 2

चंदा मामा का राज है क्या, इनका बहुरंग स्वभाव है क्या
धरती के अंश से जन्म लिए, जीवन धरती सा प्राप्त है क्या
बच्चों के ये मामा बन जाते, आशिक दल को महबूब दिखें
बूढ़ी ताई इन्हें माई कहे, हैं कलाधर इनका रंग है क्या

स्पेस की जटिल कहानी के, एक पात्र बने चंदा मामा
जब तीन देश इन तक पहुंचे, इसरो ने भी था तब ठाना
पहला जो यान गया इन तक, बस चक्कर था उद्देश्य वहां
इनके घर की सब्जी रोटी के, रंग का भेद था उसने गुना

लगे साल एकादश अहर्निश, इसरो ने काम किया उत्तम
दक्षिण का ध्रुव है जटिल बड़ा, आसान लक्ष्य कब हमने गढ़ा
है कठिन परिश्रम सबने किया, तब यान द्वितीय तैयार किया
ऑर्बिटर, रोवर और प्रज्ञान की तिकड़ी को करना है प्रस्थान

चंदा की मिट्टी बड़ी महंगी, अमेरिका वसूले सत्तर अरब
अपना सलेम तब काम किया, चट्टान चांद सम प्राप्त किया
पंद्रह हजार लैंडिंग का प्रयोग, सब देशी है अपनी तकनीक
सबसे सस्ता था मिशन द्वितीय, जब चांद की ओर प्रस्थान किया

सब कुछ था योजना के अनुरूप, तैतालिस दिन का पथ विस्तार
सम्पूर्ण विश्व की नजर भिड़ी, कर देगा भारत चमत्कार
ऑर्बिटर भी जब अलग हुआ, तब आस बढ़ी सब हो उत्तम
चंदा की सतह का प्रथम चित्र, वास्तव में था वो सर्वोत्तम

रास्ते की सभी बाधा निकली, बस लैंडिंग की दरकार बची
था विश्व जगा उस रात पहर, आंखों में नींद कहां थी रची
प्रधानमंत्री भी थे इसरो में, साक्षी बनने को वहां हर पल
एक डर भी था सबके मन में, ईश्वर सब काज करें सकुशल

अन्तिम के दो किलोमीटर, भारी पड़ गए सब मेहनत पर
संपर्क टूटा और टूटे दिल, फिनिशिंग लाइन तक पहुंच कर
आंखों से आंसू बह निकले, दिल में था मगर सम्मान प्रबल
है धन्य मेरी भारतभूमि, है धन्य यहां के ज्ञान और जन

सबने साष्टांग किया श्रम को, पूरी जनता है साथ खड़ी
अब तो चंदा की थाली में, खाएंगे संग, ये जिद है बड़ी
विश्वास करो और आगे बढ़ो, कुछ पल की ही तो दूरी है
अब लक्ष्य चुनो और विजय करो, ये चाहत अभी अधूरी है

7 Comments

    1. हिम्मत न हारिए, बिसारिए न राम को। दुखद है लेकिन भरोसा रखिए, जीत निश्चित है।

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      1. 11 साल से लगातार मेहनत किया और अंततः ….हां सर भरोसा ही तो है

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      2. उनके बारे में सोचिए जिनके 11 साल अब वापस नहीं आएंगे। जो दिन रात मिशन में जुटे थे और परिवार भी इंतजार करना बंद कर चुका था। उन पर क्या बीत रही होगी। सफलता की दहलीज पर पहुंच कर उसे गले न लगा पाने का दर्द बहुत बड़ा होता है जो मनुष्य को तोड़ देने के लिए काफी होता है।

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  1. कविता के माध्यम से बहुत ही अच्छे तरीके से आपने इस भावना को प्रगट किया है।👌

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