शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

हमारे जीवन के हर पल और हर गतिविधि में हमारे शिक्षकों का बहुत बड़ा योगदान होता है। अक्षरज्ञान से लेकर व्यावसायिक शिक्षा और शिक्षा ग्रहण करने के बाद जीवन पर उसके व्यापक प्रभाव में हमारे शिक्षकों की छाया हमेशा दिखती है। भारत में 5 सितंबर का दिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिवस हमारे देश के महान शिक्षक और पूर्व राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन के अवसर पर 1967 से अनवरत मनाया जाता है। डॉ राधाकृष्णन का मानना था – Teachers should be the best minds in the country.

आज शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रस्तुत है शिक्षकों के महत्व पर प्रकाश डालती हुई मेरी स्वरचित कविता। साथ ही मैंने वर्तमान शिक्षा प्रणाली में शिक्षकों के समक्ष चुनौतियों को भी रेखांकित करने का एक प्रयास किया है। उम्मीद है मेरी इन पंक्तियों को आप अपने जीवन के करीब महसूस कर सकेंगे –

शिक्षा का मोल अनंत यहां, शिक्षक इसके ध्वजवाहक हैं
जीवन की अंधेरी राहों में, शिक्षा की मशाल के वाहक हैं
काला अक्षर सम भैंस हो जब, वो अक्षरज्ञान कराते हैं
साक्षर से शिक्षित की हर डगर, धर हाथ वो पार कराते हैं

जननी और जनक देते जीवन, शिक्षक जीवन दिखलाते हैं
जीवन की मुश्किल राहों पर, टिककर चलना सिखलाते हैं
है ज्ञान भरा पुस्तक में बहुत, पर ज्ञान ग्रहण वो कराते हैं
कोई एक पीढ़ी को सजाता है, शिक्षक युग के निर्माता हैं

हो छात्र प्रखर या हो उद्दंड, सूरज सम शिक्षक की छाया
प्रत्येक को समुचित ज्ञान मिले, उद्देश्य यही एक अपनाया
है कार्य क्षेत्र में कठिन डगर, शिक्षक शिक्षण में लीन मगर
एकमात्र लक्ष्य है जीवन भर, शिक्षा की ज्योति जले हर पल

कुछ दर्द भी हैं शिक्षक गण के, अक्सर जो दिख ना पाते हैं
शिक्षा विभाग के उन्नायक ही, शिक्षा का मजाक बनाते हैं
शिक्षण से इतर दुनिया भर के, कार्यों में उन्हें उलझाते हैं
फिर गुणवत्ता की उम्मीद लगा, शिक्षक को डांट पिलाते हैं

शिक्षा का जब अधिकार मिला, तब एक अनुपात बनाया था
छात्रों की संख्या पर शिक्षक, हों नियुक्त ये नियम बताया था
पर्यन्त दशक पर छात्रों को, नहीं मिले कहीं पर्याप्त गुरु
सरकारी काम मिला इतना, शिक्षण आखिर कब करें शुरू

फिर भी शिक्षक हर हालत में, शिक्षा का अलख जगाते हैं
अपवादों की भी कमी नहीं पर, हर दुख वो सह जाते हैं
सेवा की बदलती शर्तों को भी, हंस कर गले लगाते हैं
हर छात्र पढ़े और आगे बढ़े, एकमात्र ध्येय अपनाते हैं

स्तर हो प्रथम या उच्च, प्रवर, शिक्षक बिन कोई राह नहीं
निजी विद्यालय या सरकारी, शिक्षण से इतर कोई चाह नहीं
मेरे जीवन के हर पल में, मेरे हर शिक्षक की छाया
साष्टांग दंडवत अभिनन्दन, हैं धन्य गुरुजनों की माया

आप सभी को शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं एवं समस्त शिक्षक समुदाय को मेरा सादर अभिनन्दन।

© अरुण अर्पण

Image credit – Google images

3 Comments

  1. बहुत सुंदर लिखा सर जी, एक शिक्षक का महत्व और उनके दर्द पर भी प्रकाश बेहतरीन तरीके से डाला।

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