मित्रता दिवस की शुभकामनाएं

मित्र हर किसी के जीवन की अनमोल निधि होते हैं। कई बार कुछ मामले ऐसे भी आते हैं जहां धोखे की घटना से मित्रता को कलंकित किया जाता है मगर मेरी समझ से ऐसे लोग मित्र की परिभाषा में आते ही नहीं। जहां स्वार्थ है वहां मित्रता हो ही नहीं सकती क्योंकि स्वार्थ और मित्रता एक दूसरे के प्रबल शत्रु हैं।

मुझे नहीं पता कि मैं मित्र की श्रेणी में आता हूं या नहीं लेकिन इतना जरूर जानता हूं कि मैं उन भाग्यशाली लोगों में जरूर शामिल हूं जिनके पास वास्तविक रूप से मित्र उपलब्ध हैं।

आप सभी को मित्रता दिवस की बहुत बहुत बधाई। ईश्वर हमारी मित्रता आजीवन कायम रखें।

लीजिए प्रस्तुत हैं कुछ काव्यात्मक पंक्तियां सिर्फ और सिर्फ – मित्रों के नाम

हम मित्र उन्हें ही कहते हैं

परिवार की परिभाषा से परे, कुछ लोग सुनहरे मिलते हैं
नहीं खून के रिश्ते उनसे पर, अनमोल बड़े वो होते हैं
हर कदम की आहट से वाकिफ, हर ग़म में सहारा देते हैं
दुनिया में अनेकों नाम मगर, हम मित्र उन्हें ही कहते हैं

आंखों की लाली देख के वो, मन की हर बात समझ लेते
दुनिया देती हो भले गाली, पर मित्र का साथ वही देते
जब खून किनारा करता है, तो याद वही फिर आते हैं
दुनिया में अनेकों नाम मगर, हम मित्र उन्हें ही कहते हैं

हर रिश्ते में छाया उनकी, है अजब कहानी जीवन की
रिश्तों में उन्हें सब ढूंढ रहे, और उनमें झलक हर रिश्ते की
हर राह के वो हमराह सदा, मस्ती का किनारा होते हैं
दुनिया में अनेकों नाम मगर, हम मित्र उन्हें ही कहते हैं

बचपन का साथी पचपन में भी, बचपन याद दिलाता है
चेहरे पर झुर्री लटक रही, पर दिल में उमंग जगाता है
हो मर्ज कोई या गम दिल में, वो दवा स्वयं बन जाते हैं
दुनिया में अनेकों नाम मगर, हम मित्र उन्हें ही कहते हैं

हर रिश्ते के पूरक हैं सखा, इनके रिश्ते का न नाम कोई
ना कोई उम्मीद, अपेक्षा है, इनको क्या करे बदनाम कोई
एक मित्र की राह अगर भटकी, वापस उसको फिर लाते हैं
दुनिया में अनेकों नाम मगर, हम मित्र उन्हें ही कहते हैं

वो मित्र नहीं जो कत्ल करे, हो खनक द्रव्य की जिसे प्यारी
वो मित्र नहीं जो साथ नहीं, जब मित्र को कष्ट बड़ा भारी
है मित्र की राह सदा कॉमन, मझधार के माही होते हैं
दुनिया में अनेकों नाम मगर, हम मित्र उन्हें ही कहते हैं

हर दिन उनका, हर पल उनसे, एक या दो दिन का ठौर नहीं
फिर भी दुनिया की दौड़ में कोई, छूट नहीं जाए पीछे कहीं
है मित्र दिवस, कुछ बिछड़ों को, चलो साथ पुनः ले आते हैं
दुनिया में अनेकों नाम मगर, हम मित्र उन्हें ही कहते हैं

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