सामयिकी – 7 जुलाई 2019

  • अंधाधुंध भूजल दोहन पर पर्यावरणीय हर्जाना
    • चेन्नई जैसे जल संकट से चिंतित National Green Tribunal द्वारा पेयजल बचाने के लिए बड़ा कदम
    • उद्‍योग, व्यावसायिक इंफ्रास्ट्रक्चर, बिल्डर और खनन क्षेत्र मुख्य रुप से निशाने पर
    • हर्जाना विगत वर्षों में निर्धारित क्षेत्र के उपभोक्ता की ओर से गैर कानूनी ढंग से निकाले गए भूजल की कुल मात्रा के आधार पर वसूला जाएगा
    • घरेलू उपभोक्ता और संस्थागत क्षेत्र भी इसके दायरे में होंगे जबकि कृषि क्षेत्र को इसमें शामिल नहीं किया गया है
    • पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति देश के सभी अधिसूचित अथवा गैर अधिसूचित विकास खंडों के साथ शहरी क्षेत्रों में भी लागू होगी
    • इसकी गणना के लिए अतिदोहित, Critical, Semi-Critical व सुरक्षित क्षेत्रों की अलग–अलग दरें तय होंगी
      • उदाहरणार्थ सुरक्षित क्षेत्र में स्थापित एक कागज उद्‍योग की जल खपत प्रतिदिन 6000 घन मीटर है। अगर वह तीन साल से गैरकानूनी ढंग से दोहन कर रहा है तो प्रतिदिन 50 रुपए प्रति घनमीटर की दर से 41 करोड़ रुपए की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति भरेगा
    • अभी तक उद्‍योगों, व्यावसायिक, इंफ्रास्ट्रक्चर, बिल्डर और खनन क्षेत्र में काम करने वालों को भूजल दोहन के लिए Central Ground Water Authority से अनुमति लेनी पड़ती है। यह प्रक्रिया इतनी लचर थी कि कोई भी इसका पालन नहीं करता था
  • यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में जयपुर शामिल
    • जयपुर – राजस्थान की राजधानी
    • यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति की अजरबैजान की राजधानी बाकू में हुई बैठक में जयपुर को विश्व विरासत स्थलों की सूची में शामिल करने की घोषणा
    • जयपुर यह सम्मान पाने वाला अहमदाबाद के बाद दूसरा शहर बना
    • 21 देशों में से 16 देशों ने जयपुर के प्रस्ताव का समर्थन किया जिनमें चीन, ब्राजील, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया, बहरीन और क्यूबा जैसे देश शामिल हैं
  • पानी पर हाहाकार – बर्बादी की कहानी
    • उपलब्धता में 70 प्रतिशत की गिरावट
      • भारत जल की तनाव वाली श्रेणी (Water Stressed) में
        • अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता 1700 घनमीटर से कम होने पर उस देश को Water Stressed कहा जाता है
      • 1951 में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता – 5177 घनमीटर
      • 2011 में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता – 1545 घनमीटर
      • पिछले साठ सालों में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता में 70 प्रतिशत की कमी
      • सरकारी अध्ययनों के अनुसार भारत जल वंचित श्रेणी की तरफ तेजी से बढ़ रहा है
        • प्रति व्यक्ति उपलब्धता 1000 घनमीटर से कम होने पर संबंधित देश को जल वंचित कहा जाता है
    • भविष्य का अनुमान भयावह
      • 2001 में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता – 1820 घनमीटर
      • 2011 में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता – 1545 घनमीटर
      • 2025 तक जल उपलब्धता का अनुमान – 1341 घनमीटर
      • 2050 तक जल उपलब्धता का अनुमान – 1140 घनमीटर
    • बारिश का दुरुपयोग
      • केंद्रीय जल आयोग के अनुसार भारत की सालाना जल जरुरत 3000 अरब घनमीटर है
      • भारत में सालाना औसतन 4000 अरब घनमीटर बारिश होती है
      • दुखद है कि भारत के 130 करोड़ लोग इन अनमोल बूंदों के तीन चौथाई हिस्से का भी सदुपयोग नहीं कर पाते हैं
      • एकीकृत जल संसाधन विकास पर गठित राष्ट्रीय आयोग की रिपोर्ट बताती है कि सालाना लोगों द्वारा बारिश के कुल 1123 अरब घनमीटर पानी का ही इस्तेमाल हो पाता है जिसमें 690 अरब घनमीटर सतह पर मौजूद जल है तथा 433 अरब घनमीटर रिसकर भूजल में मिलता है। बाकी सारा का सारा पानी व्यर्थ चला जाता है जिसे बचाकर हम निश्चित रुप से पानीदार बन सकते हैं
    • भूजल की स्थिति
      • पेयजल के लिए सर्वाधिक भूजल का ही इस्तेमाल होता है लेकिन देश की कुल सिंचाई का 80 प्रतिशत भी भूजल पर ही निर्भर है।
      • कृषि और उद्‍योगों में देश के कुल भूजल का 12 प्रतिशत हिस्सा समाप्त हो जाता है
      • अपनी जरुरतों के लिए भूजल के उपयोग को आसान मानने की सोच की वजह से भारत सबसे अधिक भूजल दोहन करने वाला देश बन गया है। स्थिति इतनी भयावह है कि भारत का भूजल दोहन दूसरे स्थान पर चीन और तीसरे स्थान पर अमेरिका के सम्मिलित दोहन से भी ज्यादा है
    • भूजल और पेयजल
      • भारत के कुल भूजल दोहन का केवल आठ प्रतिशत ही पेयजल के रुप में प्रयोग किया जाता है।
      • भारत का अधिकांश भूजल अभी पीने योग्य है जबकि अन्य स्रोतों के जल को पीने के लिए परिष्कृत करने की जरुरत होती है
      • सिंचाई प्रणाली की कुशलता निम्न स्तर की होने के कारण सिंचाई में इस्तेमाल होने वाले कुल पानी का 60 प्रतिशत हिस्सा बर्बाद हो जाता है
    • गिरता भूजल स्तर
      • सरकारी अध्ययनों के अनुसार देश का भूजल स्तर 0.3 मीटर सलाना की दर से गिर रहा है
      • एक अनुमान के मुताबिक 2002 से 2008 के बीच भारत ने 109 घन किमी भूजल का इस्तेमाल किया है जो देश के सबसे बड़े Surface जलाशय Upper वैनगंगा की क्षमता का दोगुना है
      • इस प्रकार सिंचाई के लिए अन्य स्रोतों का इस्तेमाल बढ़ाकर भूजल के दबाव को कम किए जाने की जरुरत है
    • उद्‍योगों की जरुरत
      • एक सार्वभौमिक विलायक, शीतलक और सफाई करने वाले तत्व के रुप में पानी उद्‍योगों की अनिवार्य जरुरत है। ज्यादातर उद्‍योगों ने भूजल निकालने के लिए खुद के बोरवेल लगा रखे हैं किंतु अत्यधिक दोहन के चलते पानी न मिलने पर कई बार कारोबार ठप भी करना पड़ता है।
      • World Resource Institute की एक रिपोर्ट के अनुसार 2013 से 2016 के बीच 14 से 20 Thermal Power Plant को पानी की कमी के कारण अपना काम बंद करना पड़ा था
      • उद्‍योगों को पानी इस्तेमाल के विकल्पों को तलाशना होगा अथवा जितना पानी साल भर इस्तेमाल करते हैं उतना धरती में पुनर्भरण करना पड़ेगा तभी पानी की समस्या से निजात मिल सकेगी
    • घरेलू बर्बादी और RO Purifier
      • एक अनुमान के मुताबिक हमारे घरों में इस्तेमाल होने वाला 80 प्रतिशत पानी बर्बाद हो जाता है और अधिकांश मामलों में इस पानी को शुद्ध करके दूसरे या कृषि में इस्तेमाल नहीं किया जाता
      • इजराइल अपने शत–प्रतिशत इस्तेमाल पानी का शुद्धिकरण करता है और घर में इस्तेमाल होने वाले पानी के 94 प्रतिशत को Recycle किया जाता है
      • वाटर प्यूरीफायर के बढ़ते कारोबार ने भी पानी की बर्बादी को बढ़ाया है। आरओ के एक लीटर पानी प्राप्त करने के लिए चार लीटर पानी की जरुरत होती है।
      • मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी द्वारा अहमदाबाद में किए गए एक अध्ययन के अनुसार आरओ आधारित वाटर प्यूरीफायर 74 प्रतिशत पानी का नुकसान करते हैं
    • बोतलबंद पानी
      • ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड से पंजीकृत 6000 कंपनियां देश में बोतलबंद पानी के कारोबार से जुड़ी हुई हैं
      • औसतन हर घंटे एक कंपनी पांच हजार लीटर से बीस हजार लीटर तक पानी धरती से निकाल रही है
      • सालाना पंद्रह प्रतिशत की दर से बढ़ रहे इस कारोबार में पानी इस्तेमाल में बर्बादी की दर 35 प्रतिशत है
  • पशु संक्रमण आनुवांशिक कारणों की खोज
    • खुरपका और मुंहपका रोग पशुओं में होने वाला संक्रामक विषाणुजनित रोग है
    • इस रोग से पीड़ित पशुओं के लक्षणों में तेज बुखार, मुंह से लार निकलना, मुंह और खुरों में छाले पड़ना, लंगड़ाकर चलना शामिल है। इसके अलावा पशुओं की कार्यक्षमता क्षीण हो जाती है और समय से इलाज न मिलने पर पशुओं की मौत भी हो जाती है
    • नैनीताल स्थित खुरपका–मुंहपका रोग निदेशालय के वैज्ञानिकों के नेतृत्व में किए गए शोध में एक डेयरी फार्म पर मवेशियों में होने वाले संक्रमण फैलाने वाले FMDV सीरोटाइप O/ME-SA/Ind2001D नामक उपवंशावली के विषाणु के आनुवांशिक और प्रतिजनी विविधताओं के विश्लेषण किए गए। यह अध्ययन शोध पत्रिका प्लॉस वन में प्रकाशित हुआ है
    • खुरपका–मुंहपका रोग विषाणु के सात सीरोटाइप होने के कारण इसके विरुद्ध कोई एक टीका बनाना कठिन है तथा कई बार पारंपरिक टीकों का भी कोई असर नहीं होता
    • इन टीकों में जीवंत विषाणु होते हैं और कई बार टीका लगाने से भी बीमारी फैल जाती है
    • शोधकर्ताओं का कहना है कि यह विषाणु पशुओं की लसिका ग्रंथियों और अस्थिमज्जा में भी जीवित रह जाता है इसलिए इसको जड़ से समाप्त करना मुश्किल होता है

साभार – दैनिक जागरण (राष्ट्रीय संस्करण) दिनांक 7 जुलाई 2019 

आज के अंक से संबंधित पीडीएफ डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें – सामयिकी – 7 जुलाई 2019

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