विचार श्रृंखला – 29

एक सफ़र का साथी और भी था

देश की सुरक्षा में तैनात सैनिक यह कभी भी नहीं सोचता कि उसके पीछे उसके घर वालों का क्या होगा। उसके सामने सिर्फ एक ही लक्ष्य होता है कि देश की तरफ उठने वाली हर टेढ़ी नजर उठने से पहले ही अंधी कर दी जाए। सीमा पर अपने कर्तव्यों के निर्वहन के साथ साथ वह देश के अंदर और बाहर अनेकों कठिन चुनौतियों का सामना करता है और देशवासियों को हर पीड़ा से उबारने का हर संभव प्रयास करता है। हाड़ और मांस से बना वह सैनिक अपने ड्यूटी के समय के बाहर किसी का बेटा होता है तो किसी का भाई, पति या पिता। अर्थात कहीं न कहीं मानव स्वभाव में शामिल भावनाएं उसके अंदर भी होती हैं। लेकिन जब बात देश की आती है तो उसके लिए सारी भावनाओं से बढ़कर देश होता है और वह बिना एक पल गंवाए देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देता है।

दुख होता है जब एसी कमरों में बैठकर कुछ लोग हमारे वीरों के पुरुषार्थ का आंकलन करने का दुस्साहस करते हैं। ये वो लोग होते हैं जिनको सैनिक जीवन के ताप की एक छोटी सी आंच भी नहीं लगी होती है और उन्हीं सैनिकों में से कुछ की 24 घंटों की सुरक्षा में अपना जीवन काटते हैं। फिर भी सैनिक इतना अनुशासित होता है कि हर उल्टी सीधी बात को सुन समझकर भी अपने कर्तव्य से विचलित नहीं होता और हर परिस्थिति में कठिन से कठिन चुनौती का सामना करने के लिए तत्पर रहता है।

आज के आर्थिक दौर में शायद ही किसी के पास समय है कि सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के अलावा उन शहीदों के सम्मान में कुछ करने की सोच सके। किन्तु मोमबत्ती संस्कृति के पुजारियों से इतनी अपील अवश्य है कि अपने जीवन के हर खुशी के मौके पर एक मोमबत्ती या दीपक अपने देश के सैनिकों के नाम पर भी अवश्य जलाएं। हो सकता है कि किसी शहादत का प्रत्यक्ष प्रभावित आपका ही कोई अपना हो।

बचपन की अपनी टोली में
हर पल के उस हमजोली ने
जीवन के रंग जिए जितने
हर ईद, दीवाली, होली में
सब महल बनाते सपनों के
उसका सपना अलबेला था
सब जीवन में रंग भरते रहे
उसको वर्दी का सपना था
स्कूल छोड़ जब हम सबने
कॉलेज की डगर थामा था
तब तक वो वापस आया था
तन पर वर्दी, मन भारत था
हम पैसे पैसे करते थे
वो हर दिन रण में जाता था
हम चोट लगे तो रोते थे
उसका तो मौत से कांटा था
जिस रात को सोए हम सुख से
उसकी आंखों में नींद ना थी
परिवार हमारा साथ रहा
उसको खुद की परवाह ना थी
भारत मन का वो उत्साही
हर पल जिसका भारत का था
जब तक हम जीवन को जीते
वो मौत से बाजी जीत गया
बलिदान दिया सर्वोच्च मगर
भारत जीते यह याद रहा
खुद टुकड़ों में घर आया था
पर देश ना टूटे याद रहा
मां बाप बहन भाई बीवी
बच्चों का सहारा छूट गया
दुनिया की डगर कांटों से भरी
उनका तो किनारा टूट गया
बस याद रहे भारत वालों
हर खुशी में दीप मिले उसको
यह याद रहे बस सदियों तक
एक सफ़र का साथी और भी था

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