सामयिकी – 28 अप्रैल 2019

  • देश भर में MBBS Final Year की परीक्षा एक साथ
    • National Medical Commission द्वारा प्रस्तावित Exit Exam की जगह Common Exam. इसे ही Exit Exam या पात्रता परीक्षा माना जाएगा।
      • Exit Exam – MBBS करने के बाद छात्र–छात्राओं की योग्यता में एकरुपता लाने के उद्देश्य से NMA द्वारा प्रस्तावित परीक्षा जिसका पूरे देश में छात्रों द्वारा विरोध किया गया था। इस परीक्षा के पास करने के बाद ही प्रैक्टिस लाइसेंस दिए जाने का प्रस्ताव था।
  • जीन समूहों को क्रमबद्ध करने की परियोजना
    • वैज्ञानिक एवं औद्‍योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) के Institute of Genomics and Integrative Biology (IGIB) द्वारा विभिन्न ग्रामीण अंचलों में रहने वाले लगभग 1000 युवाओं के जीन समूहों को क्रमबद्ध करने की योजना
    • उद्देश्य – नई पीढ़ी को जीन विज्ञान की उपयोगिता से अवगत कराना
    • प्रक्रिया –
      • रक्त के नमूनों का उपयोग
      • संबंधित व्यक्ति को एक रिपोर्ट दी जाएगी और ऐसे जीनों के बारे में बताया जाएगा जिनकी वजह से कुछ दवाएँ कम असर करती हैं।
        • उदाहरण – एक खास जीन की मौजूदगी के कारण दिल के दौरे को रोकने के लिए दी जाने दवा “क्लोपिडोग्रेल” का असर कुछ लोगों पर कम होता है।
    • प्रोजेक्ट में हैदराबाद स्थित Centre for Cellular and Molecular Biology (CCMB) भी शामिल होगी
    • परियोजना लागत – 18 करोड़ रुपए
  • दुनिया की पहली व्यावसायिक 5G सेवा
    • दक्षिण कोरिया और अमेरिका द्वारा शुरुआत – दक्षिण कोरिया की तीन मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों और अमेरिका के दो शहरों के कुछ हिस्सों में
    • दावा – एक खास स्मार्टफोन के जरिए 5G की इंटरनेट स्पीड सामान्य स्मार्टफोन के मुकाबले 20 गुना अधिक होगी। Technology Consultancy IDC Asia Pacific में वरिष्ठ Research Manager निखिल बत्रा के मुताबिक यह स्पीड 4G की 10 गुना होगी।
    • मोबाइल नेटवर्क के विभिन्न “जी” का योगदान –
      • 1G Voice
      • 2G Text
      • 3G Picture
      • 4G Video
      • 5G पूरे नेटवर्क में विशाल डाटा का transfer
    • संभावित फायदे –
      • उच्च गुणवत्ता के प्रसारण को सक्षम बनाएगा
      • Live Sports और Cloud Gaming का बेहतरीन अनुभव
      • Maping Apps और Shopping अनुभव और बेहतर
      • चालकविहीन कारों के लिए भी महत्वपूर्ण
      • दूर से सर्जरी और होलोग्रफिक वीडियो कॉल को और बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण
  • इजराइली तकनीक से तैयार जामुनी आम
    • रंग जामुन का, स्वाद आम का
    • भारत और इजराइल से सहयोग से बने Centre of Excellence for Fruit पाली, बस्ती में रंगीन आम के 2000 पौधे तैयार किए जा रहे हैं
    • सभी प्रकार के आम का सीजन समाप्त होने पर पकेगा
    • वैज्ञानिकों के अनुसार इसका स्वाद अन्य आमों से बेहतर होगा
    • तैयार होने वाली प्रजातियों में पीतांबर, अरुणिमा, अंबिका, उषा, सूर्या, रुमानी और मल्लिका शामिल
    • इस आम के पौधे एक साल में ही फल देने लगते हैं हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि तीन साल वाले पौधों के फल ही बेहतर होंगे
    • प्रयुक्त इजराइली तकनीक में पौधे मरते नहीं है तथा कीट–रोग का खतरा नहीं होता है। सिंचाई ड्रिप सिस्टम से की जाती है।
  • चीड़ की पत्तियों (पिरुल) के प्रयोग से ईको–फ्रेंडली ईंधन का निर्माण
    • भारतीय प्रौद्‍योगिकी संस्थान (IIT) रुड़की के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित विधि
    • एक खास तरह की portable machine की मदद से साबुन के आकार की टिकिया तैयार की जाएगी जिसका इस्तेमाल घरों के साथ – साथ होटलों और ढाबों में भी खाना बनाने के लिए किया जा सकेगा
    • मशीन पूरी तरह मैनुअल है और इसे चलाने के लिए बिजली और पानी की कोई जरुरत नहीं है। सिर्फ दबाव बनाकर मशीन को चलाया जा सकता है।
    • एक टिकिया बनाने के लिए 250 ग्राम चीड़ के पत्तों की जरुरत
    • एक टिकिया 15 मिनट तक जलेगी तथा इसके निर्माण में किसी भी प्रकार के रसायन का प्रयोग नहीं होगा और इसलिए इसके जलने से कार्बन, नाइट्रोजन, सल्फर आदि हानिकारक गैसों का उत्सर्जन नहीं होगा
    • पोर्टेबल मशीन की कीमत लगभग 10 हजार रुपए होगी
    • पायलट प्रोजेक्ट के तहत उत्तराखंड के अल्माेड़ा और नैनीताल जिलों का चयन
    • लगभग 200 ग्रामीणों को प्रशिक्षित किया जाएगा और वन विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी इसके मास्टर ट्रेनर होंगे
  • सहमति से यौन संबंध में पोक्सो एक्ट में संशोधन की सलाह
    • मद्रास हाईकोर्ट के अनुसार 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और किशोर या किशोरावस्था से थोडा अधिक उम्र के लड़के के संबंध को ‘अस्वाभाविक’ नहीं ठहराया जा सकता
    • 16 से 18 साल की उम्र के बीच सहमति से बने यौन संबंधों को पोक्सो कानून के दायरे से बाहर लाने की भी सलाह
    • पोक्सो कानून की धारा 2 (डी) के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के व्यक्ति को एक ‘बच्चे’ रुप में परिभाषित किया गया है तथा कम से कम 7 से 10 साल तक की सजा का प्रावधान है।

साभार– दैनिक जागरण (राष्ट्रीय संस्करण) दिनांक 28 अप्रैल 2019

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