विचार श्रृंखला – 19

ये कैसा वेलेंटाइन

आज सुबह से ही हर जगह वेलेंटाइन डे की धूम मची हुई है। शादीशुदा लोग खुलेआम वेलेंटाइन मना रहे हैं तो कुछ अन्य छुप कर या ऑनलाइन ही इस दिन का आनंद ले रहे हैं।

एक वर्ग ऐसा भी है जो वेलेंटाइन डे के विरोधस्वरूप इस दिन को मातृ पितृ वंदन दिवस के रूप में मनाता है और ऐसा करने के उनके अपने कारण हैं।

एक समूह ऐसा भी है जिसने इस दिन को ऐतिहासिक मोड़ देते हुए इसे आजादी की लड़ाई के तीन सबसे चर्चित शहीदों के यादगार के तौर पर मनाया।

कुल मिलाकर जिसने जिस तरह से भी मनाया उन सबके अपने अपने वैध कारण तो थे। लेकिन जिस निर्ममता के साथ जम्मू कश्मीर में सीआरपीएफ के जवानों की गाड़ी ब्लास्ट में उड़ा दी गई उसका कोई भी कारण कभी वैध हो ही नहीं सकता। अगर वो कुछ भी है तो सिर्फ और सिर्फ एक खोखला वहशीपन और शुद्ध दरिंदगी ही है।

क्या बीत रही होगी उस पत्नी या प्रेमिका पर, जिसे उसका पति या प्रेमी कुछ देर पहले ही वेलेंटाइन के मीठे सपनों में छोड़ कर देश रक्षा के लिए चला गया था?

क्या बीत रही होगी उन मां बाप पर, जिनका बेटे ने आज ही मातृ पितृ वंदन दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उनसे लंबी उम्र और सुखद जीवन का आशीर्वाद लिया था?

आज देश का हर नागरिक भारत माता के उन सपूतों के बलिदान पर नम आंखों के साथ नतमस्तक है। सोशल मीडिया उनके सम्मान के संदेशों और देश के गुस्से से भरा पड़ा है। लेकिन आज के बाद कल क्या होगा? सारा गुस्सा एक तरफ रख कर लोग फिर से व्यस्त हो जाएंगे एक नए हादसे के इंतेजार में। देश के नीति नियंता भी बेहद कड़ी निंदा करके आने वालों चुनाव की तैयारी में लग जाएंगे और जीवन भर रोते रह जाएंगे उन शहीदों के परिजन। ये वही लोग हैं जिन्होंने उस इंसान को खोया है जो उनकी जीविका का एकमात्र स्रोत था (इसी विषय पर पढ़ें मेरी कविता काव्य श्रृंखला – 17)।

उम्मीद है कि अपने वर्तमान कार्यकाल के बचे समय में मोदी सरकार ऐसे कुकृत्य का मुंहतोड़ जवाब देने का वही साहस जुटा सकेगी जो उसने उरी हमले के बाद दिखाया था। साथ ही साथ राजनेता ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर गंदी राजनीति करने से बाज आएं तथा देशहित के मुद्दे पर एकजुट दिखने का दम दिखा सकें।

देश के महान वीरों की शहादत पर हमारी भावभीनी श्रद्धांजलि। नहीं चाहिए हमें ऐसा वेलेंटाइन डे या कोई भी अन्य डे जिस दिन हमारे वीर सैनिकों की बलि चढ़ाई गई हो।

जिस दिन दें प्राण हमारे वीर, देश की रक्षा में डटकर

मन सकता नहीं त्योहार कोई, उस दिन भारत के अंदर

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